परिवार को क्रिकेट का जुनून विवेक के पिता सुदर्शन से मिला.
विवेक के पिता अपने समय में क्रिकेट क्लब में खूब क्रिकेट खेला करते थे. उनके पास उन दिनों की कई कहानियां हैं. वे अब 72 साल के हैं.
सुदर्शन बताते हैं, "जब हम सिंगापुर आए थे तो क्रिकेट को अपने साथ ही लाए थे. पहले मैं गवास्कर और द्रविड़ का बहुत बड़ा फैन था और अब मुझे धोनी बहुत पसंद हैं. उनके जैसा समझदार खिलाड़ी और कोई नहीं मिलेगा."
अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए सुदर्शन कहते हैं, "मैंने अपना सारा जीवन क्रिकेट के साथ काटा. मेरे बेटे और पोते भी अब क्रिकेट को लेकर उतनी ही रूचि रखते हैं. यह हमारे लिए पारिवारिक पहचान की तरह है."
विवेक का परिवार दो साल पहले से विश्व कप देखने की योजना बना रहा था. वे तभी से इस यात्रा के लिए पैसे जोड़ रहे थे.
विवेक इस बारे में बताते हैं, "हां, हमने इस यात्रा पर बहुत पैसा खर्च किया है. मैं इस बात का समर्थन करता हूं कि पैसा ज़रूरी है लेकिन किसी के लिए आपका प्यार और जुनून ज़्यादा ज़रूरी होता है."
2015 में विश्व कप देखने के लिए विवेक ऑस्ट्रेलिया गए थे. वो बताते हैं कि वो खेल को लेकर इतने उत्सुक थे कि उन्होंने बहुत पहले ही टिकट ख़रीद लिया था. उन्हें विश्वास था कि भारत जीतेगा लेकिन अंत में मायूस लौटना पड़ा था. इस बार भी विवेक आशा करते हैं कि भारत विश्व कप फाइनल जीतेगा.
क्रिकेट के लिए अपना प्यार ज़ाहिर करते हुए विवेक कहते हैं, "अगर ये कोई टेस्ट मैच होता तो इसे टीवी पर देख जा सकता था. लेकिन ये विश्व कप है, इसे कैसे टीवी पर देख सकते हैं?
हमलोग इस मैच का आनंद स्टेडियम में लेना चाहते थे और इस फ़ैसले से पूरा परिवार सहमत था. अगर हमें मैच देखने के लिए अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा भी खर्च करना पड़ता तो हम ज़रूर करते."
महाराष्ट्र का परिवार जो दो दशकों से अमरीका में रह रहा है और एक तमिल परिवार जो दो दशकों से सिंगापुर में रह रहा है, दोनों ही विश्व कप
फ़्रांस के नॉरमैंडी शहर में दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'डी-डे' की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई, जहां प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे.
टेरीज़ा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नॉरमैंडी की लड़ाई में मारे गए ब्रिटिश सैनिकों को सम्मानित करने के लिए स्मारक के उद्घाटन समारोह में भाग लिया.
गुरुवार को आगे और क्या कुछ हुआ, उसकी झलकियां तस्वीरों में देखें.
एक बैगपाइपर ने दिन की शुरुआत बैगपाइप के संगीत को बजाकर की. यह दृश्य 75 साल पहले की घटना को याद दिलाता है जब पहला ब्रिटिश सैनिक गोल्ड बीच पर उतरा था.
थेरेसा मे ने वेर-सर-मेर शहर में हो रहे समारोह में भाग लिया, जहां ब्रिटिश नॉरमैंडी मेमोरियल में पहला पत्थर रखने के लिए 6 जून 1944 की सुबह ब्रिटिश सेनाएं उतरी थी.
लड़ाई में मारे और घायल हुए ब्रिटिश सैनिकों को मैक्रों ने धन्यवाद कहा. साथ ही उन्होंने नॉरमैंडी में अब तक कोई स्मारक न होने को 'विसंगति' और 'असहनीय' बताया.
समुद्री तट की ओर अपनी बंदूके ताने तीन ब्रिटिश सैनिकों की नई स्मारक के सामने ब्रिटिश प्रधानमंत्री और फ्रांसीसी राष्ट्रपति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए.
डी-डे के 75वीं वर्षगांठ पर मारे और घायल ब्रिटिश सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए नॉरमैंडी के अरोमांचेस समुद्री तट पर कई स्थानीय निवासियों और विज़िटर्स को देखा गया.
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि डी-डे पर अमरीकी सेनाओं की 'असाधारण ताकत' उनकी सच्ची और असाधारण भावना से आई थी.
देखने के लिए ब्रिटेन आए हैं.
ये दोनों परिवार एक-दूसरे से कभी नहीं मिले, न ही ये एक-दूसरे की भाषा बोलते हैं लेकिन ये दोनों एक स्टेडियम में मौजूद थे. भले ही एक-दूसरे को नहीं समझते हों लेकिन क्रिकेट के लिए इनका प्यार एक जैसा ही है, जो इन्हें जोड़ता है.
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विवेक के पिता अपने समय में क्रिकेट क्लब में खूब क्रिकेट खेला करते थे. उनके पास उन दिनों की कई कहानियां हैं. वे अब 72 साल के हैं.
सुदर्शन बताते हैं, "जब हम सिंगापुर आए थे तो क्रिकेट को अपने साथ ही लाए थे. पहले मैं गवास्कर और द्रविड़ का बहुत बड़ा फैन था और अब मुझे धोनी बहुत पसंद हैं. उनके जैसा समझदार खिलाड़ी और कोई नहीं मिलेगा."
अपने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए सुदर्शन कहते हैं, "मैंने अपना सारा जीवन क्रिकेट के साथ काटा. मेरे बेटे और पोते भी अब क्रिकेट को लेकर उतनी ही रूचि रखते हैं. यह हमारे लिए पारिवारिक पहचान की तरह है."
विवेक का परिवार दो साल पहले से विश्व कप देखने की योजना बना रहा था. वे तभी से इस यात्रा के लिए पैसे जोड़ रहे थे.
विवेक इस बारे में बताते हैं, "हां, हमने इस यात्रा पर बहुत पैसा खर्च किया है. मैं इस बात का समर्थन करता हूं कि पैसा ज़रूरी है लेकिन किसी के लिए आपका प्यार और जुनून ज़्यादा ज़रूरी होता है."
2015 में विश्व कप देखने के लिए विवेक ऑस्ट्रेलिया गए थे. वो बताते हैं कि वो खेल को लेकर इतने उत्सुक थे कि उन्होंने बहुत पहले ही टिकट ख़रीद लिया था. उन्हें विश्वास था कि भारत जीतेगा लेकिन अंत में मायूस लौटना पड़ा था. इस बार भी विवेक आशा करते हैं कि भारत विश्व कप फाइनल जीतेगा.
क्रिकेट के लिए अपना प्यार ज़ाहिर करते हुए विवेक कहते हैं, "अगर ये कोई टेस्ट मैच होता तो इसे टीवी पर देख जा सकता था. लेकिन ये विश्व कप है, इसे कैसे टीवी पर देख सकते हैं?
हमलोग इस मैच का आनंद स्टेडियम में लेना चाहते थे और इस फ़ैसले से पूरा परिवार सहमत था. अगर हमें मैच देखने के लिए अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा भी खर्च करना पड़ता तो हम ज़रूर करते."
महाराष्ट्र का परिवार जो दो दशकों से अमरीका में रह रहा है और एक तमिल परिवार जो दो दशकों से सिंगापुर में रह रहा है, दोनों ही विश्व कप
फ़्रांस के नॉरमैंडी शहर में दूसरे विश्वयुद्ध के सबसे बड़े सैन्य अभियान 'डी-डे' की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई, जहां प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे.
टेरीज़ा मे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नॉरमैंडी की लड़ाई में मारे गए ब्रिटिश सैनिकों को सम्मानित करने के लिए स्मारक के उद्घाटन समारोह में भाग लिया.
गुरुवार को आगे और क्या कुछ हुआ, उसकी झलकियां तस्वीरों में देखें.
एक बैगपाइपर ने दिन की शुरुआत बैगपाइप के संगीत को बजाकर की. यह दृश्य 75 साल पहले की घटना को याद दिलाता है जब पहला ब्रिटिश सैनिक गोल्ड बीच पर उतरा था.
थेरेसा मे ने वेर-सर-मेर शहर में हो रहे समारोह में भाग लिया, जहां ब्रिटिश नॉरमैंडी मेमोरियल में पहला पत्थर रखने के लिए 6 जून 1944 की सुबह ब्रिटिश सेनाएं उतरी थी.
लड़ाई में मारे और घायल हुए ब्रिटिश सैनिकों को मैक्रों ने धन्यवाद कहा. साथ ही उन्होंने नॉरमैंडी में अब तक कोई स्मारक न होने को 'विसंगति' और 'असहनीय' बताया.
समुद्री तट की ओर अपनी बंदूके ताने तीन ब्रिटिश सैनिकों की नई स्मारक के सामने ब्रिटिश प्रधानमंत्री और फ्रांसीसी राष्ट्रपति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए.
डी-डे के 75वीं वर्षगांठ पर मारे और घायल ब्रिटिश सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए नॉरमैंडी के अरोमांचेस समुद्री तट पर कई स्थानीय निवासियों और विज़िटर्स को देखा गया.
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि डी-डे पर अमरीकी सेनाओं की 'असाधारण ताकत' उनकी सच्ची और असाधारण भावना से आई थी.
देखने के लिए ब्रिटेन आए हैं.
ये दोनों परिवार एक-दूसरे से कभी नहीं मिले, न ही ये एक-दूसरे की भाषा बोलते हैं लेकिन ये दोनों एक स्टेडियम में मौजूद थे. भले ही एक-दूसरे को नहीं समझते हों लेकिन क्रिकेट के लिए इनका प्यार एक जैसा ही है, जो इन्हें जोड़ता है.
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